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विश्व पर्यावरण दिवस 2024

हर साल 5 जून को, हम विश्व पर्यावरण दिवस के रूप में मनाते हैं। यह दिन हमें हमारे पर्यावरण के संरक्षण और संवर्धन के प्रति जागरूकता बढ़ाने का अवसर देता है। इस दिन का मुख्य उद्देश्य है लोगों को पर्यावरण की रक्षा के प्रति प्रेरित करना और यह समझना कि हमारा अस्तित्व प्रकृति के साथ गहरे संबंधों पर निर्भर करता है। विश्व पर्यावरण दिवस का शुभारंभ संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 1972 में किया था। पहली बार इसे 1974 में मनाया गया और तब से यह हर साल एक नए थीम के साथ मनाया जाता है। इस दिवस का उद्देश्य है पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाना और उन मुद्दों पर ध्यान आकर्षित करना जो हमारे पर्यावरण को प्रभावित कर रहे हैं। प्रकृति और मनुष्य का संबंध प्रकृति और मनुष्य का संबंध अत्यंत गहरा और जटिल है। प्रकृति हमें जीवन के लिए आवश्यक सभी तत्व प्रदान करती है – हवा, पानी, भोजन […]

SSC GD 2024
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SSC GD Recruitment 2023-24

SSC GD Recruitment 2023 : एसएससी जीडी कांस्टेबल भर्ती 2023 का नोटिफिकेशन 24 नवंबर 2023 को जारी कर दिया है। एसएससी जीडी कांस्टेबल भर्ती 26146 पदों पर आयोजित की जाएगी। SSC GD Recruitment 2023 के लिए योग्य एवं इच्छुक अभ्यर्थी ऑफिशियल वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। SSC GD Recruitment 2023 के लिए ऑनलाइन आवेदन करने की प्रोसेस और डायरेक्ट लिंक नीचे उपलब्ध करवा दिया है। एसएससी जीडी कांस्टेबल भर्ती 2023 के लिए ऑनलाइन आवेदन 24 नवंबर से 31 दिसंबर 2023 तक कर सकते हैं। SSC GD Recruitment 2023 के लिए योग्यता, आयु सीमा, आवेदन शुल्क एवं सभी जानकारी नीचे दी गई है। अभ्यर्थी आवेदन करने से पहले एक बार ऑफिशल नोटिफिकेशन जरूर देख लें। ssc gd notification 2023 pdf एसएससी जीडी कांस्टेबल भर्ती 2023 का आधिकारिक नोटिफिकेशन 24 नवंबर 2023 को जारी कर दिया है। एसएससी जीडी भर्ती 2023 का ऑफिशल नोटिफिकेशन कर्मचारी चयन आयोग की […]

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असत्य पर सत्य की विजय का पर्व

भारत की संस्कृति बताती है कि असत्य की एक न एक दिन पराजय सत्य के हाथों ही होती है। दशहरा हमें यही याद दिलाता है। अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को इसका आयोजन होता है। भगवान राम ने इसी दिन रावण का वध किया था। इस दिन शस्त्र-पूजा की जाती है। इस दिन जगह-जगह मेले लगते हैं। रामलीला का समापन होता है। रावण का विशाल पुतला बनाकर उसे जलाया जाता है। दशहरा शब्द हिंदी के दो शब्दों दस और हारा से मिलकर बना है। दस गणित के अंक दस (10) और हारा शब्द पराजित का सूचक है। इसलिए यदि इन दो शब्दों को जोड़ दिया जाए तो दशहरा बनता है जो उस दिन का प्रतीक है जब दस सिर वाले दुष्ट रावण का भगवान राम ने वध किया था। भारतीय संस्कृति वीरता की पूजक व शौर्य की उपासक है। व्यक्ति और समाज के रक्त में वीरता प्रकट […]

gandhi
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गाँधी जी और उनके सिद्धांत

भारतीय सभ्यता की श्रेष्ठता को संपूर्णता के रूप में प्रस्तुत करने वाले महात्मा गांधी के विचारों ने दुनिया भर के लोगों को न सिर्फ प्रेरित किया बल्कि करुणा और शांति के दृष्टिकोण से भारत व दुनिया को बदलने में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका मानना था कि पश्चिमी सभ्यता जहाँ भोग-विलास और शारीरिक सुख को ही अंतिम उद्देश्य मानकर चलती है, वहीं भारतीय सभ्यता आत्मिक उन्नयन की बात करती है। गांधी कहते थे कि सुख की आकांक्षा का विस्तार अनंत है तथा इसके मूल में विनाश है। अत: मानवता के सहज विकास के लिये आवश्यक है कि मनुष्य इस छलावे वाली प्रगति से उबर कर स्वाभाविक विकास को अपनाए। लेकिन वर्तमान समय में झूठ-फरेब, छलावा बढ़ता ही जा रहा है, लगभग हर व्यक्ति अपने चेहरे पर मुखौटा लगाए हुए है। आज लोग सोशल मीडिया में प्रसिद्धि पाने के लिये तरह-तरह के पैंतरे अपना रहे हैं। छोटी-छोटी बातों पर दंगे व […]

दरवाजे
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केदारनाथ सिंह : बिम्ब विधान के कवि

भारत के सर्वोच्च साहित्यिक पुरस्कार ज्ञानपीठ से सम्मानित कवि केदारनाथ सिंह आधुनिक हिंदी कविता में बिम्ब के कवि के रूप में जाने जाते हैं। उत्तर प्रदेश के बलिया जनपद में 7 जुलाई, 1934 को पैदा हुए केदारनाथ सिंह पेशे से एक शिक्षक थे। उनके बारे में उनसे पढ़े हुए विद्यार्थी बताते हैं कि वे जितने अच्छे कवि हैं, कक्षा में उतने ही श्रेष्ठ शिक्षक भी रहे। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से पढ़ाई करने के बाद कुछ समय उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में ही अध्यापन कार्य किया। अंत में वे जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में बतौर आचार्य और अध्यक्ष के रूप में कार्यरत रहे और सेवानिवृत्त हुए। केदारनाथ सिंह, अज्ञेय द्वारा सम्पादित तीसरे सप्तक जिसका प्रकाशन 1959 ई में हुआ, से प्रकाश में आते हैं और उसके बाद उनका रचनात्मक और उर्वर धरातल हिंदी कविता के सौंदर्य में अभिवृद्धि करता चलता है। ‘अभी बिलकुल अभी’ उनका पहला काव्य संग्रह भी 1960 ई में […]

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“कर्नाटक का भूगोल: प्राकृतिक सौंदर्य और सांस्कृतिक धरोहर”

प्रिय पाठकों, इस ब्लॉग में हम एक रोमांचक और ज्ञानवर्धनकारी यात्रा पर निकलने जा रहे हैं, जो हमें भारतीय भूगोल के एक महत्वपूर्ण राज्य – कर्नाटक के भूगोलिक रूपरेखा में ले जाएगी। कर्नाटक, जिसकी स्थापना केंद्रीय भारत के दक्षिण पश्चिमी भाग में हुई है, अपने प्राकृतिक सौंदर्य, ऐतिहासिक महत्व और सांस्कृतिक धरोहर के लिए प्रसिद्ध है। इस यात्रा में हम भूखंड और भू-प्राकृतिक संसाधनों की गहराईयों में खोजी करेंगे, प्रमुख नदियों और झीलों की सुंदरता में नाविक बनेंगे, उच्च और मध्य पर्वत श्रेणियों की ऊँचाइयों को छूने का प्रयास करेंगे, और वनस्पतियों और वन्यजीवों के बारे में रोचक जानकारी प्राप्त करेंगे। कर्नाटक का भूगोल हमें इस राज्य की विविधता और समृद्धि की कहानी सुनाता है, जो हमारी यात्रा को और भी रोमांचक बनाते हैं। इस ब्लॉग के माध्यम से हम आपको कर्नाटक के भूगोलिक रहस्यों में ले जाने का प्रयास करेंगे और आपको इस अद्वितीय भूगोलीक प्रदेश के पीछे की […]

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केरल “दक्षिण का स्वर्ग”

नमस्कार पाठकों! आज हम आपको एक रोमांचक यात्रा पर ले जाएंगे जो भारतीय उपमहाद्वीप के दक्षिण-पश्चिमी भाग में स्थित एक राज्य, केरल, के अनूठे भूगोलिक रूपरेखा के पीछे की कहानी पर आधारित है। केरल, भारतीय महासागर के तट पर बसा हुआ, एक रोमांचक प्राकृतिक सौन्दर्य के साथ भरपूर है। यहाँ की प्राकृतिक सौंदर्यता को देखते हुए केरल को ‘दक्षिण का स्वर्ग’ भी कहा जाता है। केरल का भूगोल बिल्कुल विविध है और यह कई प्राकृतिक सौंदर्य स्थलों से भरपूर है, जैसे कि वीडुक्कल का तापु, मुनार की पहाड़ियाँ, आलप्पुज्हा के अद्भुत समुंद्र तट आदि। केरल के भूगोल का अद्वितीय पहलू उसके पशु-पक्षियों में है। यहाँ केरल के आनोचे वन्यजीव जीवन का आनंद लेने का अवसर मिलता है, जैसे कि एलीफेंट, बाघ, लकड़बग्घा, मर्मोसेट, आदि। इसके अलावा, केरल का भूगोल भारतीय संस्कृति और परंपराओं के आदान-प्रदान का भी प्रतीक है। यहाँ की विविधता और सांस्कृतिक धरोहर यात्रीगण को मन मोह लेती […]

इतिहास से सबसे महत्वपूर्ण मध्यकालीन भारत प्रश्न
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इतिहास से सबसे महत्वपूर्ण मध्यकालीन भारत प्रश्न

satyadhisharmaclasses Satyadhi Sharma Blog – इतिहास से सबसे महत्वपूर्ण मध्यकालीन भारत प्रश्न मध्यकालीन भारत  “प्राचीन काल” और “आधुनिक काल” के बीच भारतीय उपमहाद्वीप के उत्तर-शास्त्रीय इतिहास की अवधि को संदर्भित करता है। मध्यकालीन युग 6 वीं शताब्दी और 16 वीं शताब्दी के बीच का समय है। प्रारंभिक मध्ययुगीन काल की शुरुआत उन शासकों और राजवंशों द्वारा मानी जाती है जो एक देश के रूप में एक-दूसरे से बिना किसी संबंध के अपने-अपने क्षेत्रों/क्षेत्रों की चिंता कर रहे थे। बाद में चीजें बदल गईं और इस अवधि में कुछ बेदाग शासकों ने बेहतर प्रशासन और शासन के लिए राज्यों को एकजुट करने की दृष्टि दिखाई।  मध्ययुगीन काल स्वयं प्रारंभिक मध्यकालीन और उत्तर मध्यकालीन युगों में विभाजित है। इस अवधि की शुरुआत आमतौर पर लगभग 480 से 550 तक गुप्त साम्राज्य के धीमे पतन के रूप में मानी जाती है , जो “शास्त्रीय” काल के साथ-साथ “प्राचीन भारत” को भी समाप्त करती है। अंतिम मध्ययुगीन काल भारतीय उपमहाद्वीप […]

पद्य साहित्य का इतिहास
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पद्य साहित्य का इतिहास

नमस्कार सत्याधी शर्मा क्लासेस ब्लॉग में आपका स्वागत है, आज हम इस ब्लॉग के माध्यम से हिंदी साहित्य के पद्य साहित्य के बारे में जानेंगे |   पद्य साहित्य, जो भारतीय साहित्य की एक प्रमुख शैली है, अपार रचनात्मकता और साहित्यिक महत्व के साथ भरपूर है। इसका इतिहास भारतीय साहित्य के विकास में महत्वपूर्ण स्थान रखता है, और इसे विभिन्न युगों में बदलते साहित्यिक परिवेश के अनुरूप विकसित किया गया है। इस पैराग्राफ में हम पद्य साहित्य के विभिन्न युगों की महत्वपूर्ण शैलियों और कवि-काव्यकारों के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे। चाहे वे वैदिक काव्य हों या मध्यकालीन काव्य, आदिकाव्य या आधुनिक काव्य, हमें यहां पद्य साहित्य के विकास और महत्व की पूरी जानकारी मिलेगी। पद्य साहित्य, जिसे हम भारतीय साहित्य की एक प्रमुख शैली मानते हैं, काव्य का एक रूप है जिसमें छंद, अलंकार और भाव प्रधानता से प्रयुक्त होते हैं। पद्य साहित्य का इतिहास विभिन्न युगों में विकसित हुआ […]

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